भारत में यूरोपियों का आगमन (Arrival of Europeans in India)

पुर्तगाली (1498) भारत में आए(CAPE OF GOOD HOPE) और कोची में 1503 में कंपनी की स्थापना की।

डच (1595) भारत में आए और सूरत में 1503 में कंपनी की स्थापना की।

अंग्रेज़ (1600) भारत में आए और मसूलीपट्टनम में 1503 में कंपनी की स्थापना की।

फ्रेंच (1664) भारत में आए और सूरत में 1503 में कंपनी की स्थापना की।

पुर्तगाली:

वास्तव में हुआ यह था कि 20 मई 1498 वास्कोडिगामा (Vasco De Gama) समुद्री मार्ग से व्यापार के लिए भारत में आया (VIA AFRICA)

  • “कालीकट” के हिंदू राजा “जमोरिन” से व्यापार की अनुमति ली।
  •  13 सितंबर 1500 पेड्रो अल्वारेस कैबरल (कालीकट में लड़ाई)।
  • 30 अक्टूबर 1502 मैं वास्कोडिगामा भारत बार आता है दुबारा आता है।

पुर्तगालियों के गवर्नर:

अलमिडा (ALMEIDA 1505-09)

कार्य: (1) जल शक्ति का विकास।

(2) सुरक्षा के लिए दुर्ग।

अलफान्सो दी अलबुकर्क (Alfonso De Albuquerque 1509-15)

कार्य:

  •   राजनीति में हस्तक्षेप।
  •  पुर्तगाली सैनिकों को भारत की महिलाओं के साथ शादी करने की अनुमति देना।
  •  पुर्तगाली शक्ति को मजबूत करना।
  •  व्यापार में एकाधिकार करना।
  •  1510 बीजापुर के सुल्तान युसूफ आदिलशाह से गोवा छीन लिया गया।

1515 में गोवा में अलफान्सो दी अलबुकर्क मृत्यु हो गई 1556 तक पुर्तगालियों ने इंडोनेशिया ,श्रीलंका तक कब्जा कर लिया था ईसाई धर्म का प्रचार करने के कारण सम्राट शाहजहां ने 1635 में पुर्तगालियों को हुगली से बाहर कर दिया था।

  • प्रेस (PRESS) की स्थापना पुर्तगालियों ने की।
  • तंबाकू को सबसे पहले पुर्तगालियों ने प्रस्तुत किया।
  • “हुगली” को बंगाल की खाड़ी में समुद्री लूटपाट के लिए अड्डा बना दिया गया।

मायलापुर में लूज़ चर्च,मद्रास (चेन्नई) (THE LUZ CHURCH IN MYLAPORE, MADRASS (CHENNAI) पहला चर्च था। जिसे पुर्तगालियों ने मद्रास में बनाया था उन्होंने मूल कपालेश्वर (KAPALEESHWARAR) मंदिर को भी नष्ट कर दिया था।

अंग्रेज (BRITISHER) (31 DEC. 1600)

1603 में एलिजाबेथ की मौत के बाद कंपनी “जेम्स प्रथम” द्वारा नेतृत्व की गई।

“जेम्स प्रथम” ने पहले कप्तान “विलियम हॉकिन्स” को जहांगीर के दरबार में भेजा। (1608)

1932 में गोलकुंडा सुनहरा फरमान प्राप्त हुआ। (कहने का मतलब है मुफ़्त व्यापार कोई टैक्स नहीं)

1717 में फ़र्रुख़ सियर (जाॅन सुरमन 1715 ई. में एक शिष्टमंडल जाॅन सुरमन की नेतृत्व में भारत आया। यह शिष्टमंडल उत्तरवर्ती मुग़ल शासक फ़र्रूख़ सियर की दरबार में 1717 ई. में पहुँचा।)

फ़र्रूख़ सियर को “मैग्ना कार्ट” कहा जाता था।

1661 में चार्ल्स द्वितीय (CHARLES 2ND) और कैथरीन यूरोपियन का विवाह हो गया।

मुंबई को दहेज में दे दिया गया।

1668 में 10 POUND YEARLY पर मुंबई को कंपनी को दे दिया गया।

1688 में औरंगजेब का सामना “जॉन चाइल्ड” से हुआ और जॉन चाइल्ड हार गया और दोनों के बीच संधि हुई।

  • सेंट जॉर्ज फोर्ट (मद्रास)
  • फोर्ट विलियम (कोलकाता)
  • फोर्ट लुई (पुडुचेरी)

 

 

 

 

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