State Legislature 

राज्य विधायिका

State Legislature राज्य विधायिका

विधायिका को दो भागों में बांटा जा सकता है संघीय विधायिका और राज्य विधायिका।

जो विधेयक बनाने का काम करते हैं, अर्थात जो बिल पास करते हैं उन्हें विधायिका कहते हैं।

राज्य विधान मंडल में या तो एक या दो सदन होते हैं।

विधान मंडल-

विधानमंडल 3 चीजों से मिलकर बना है: –

राज्यपाल+ विधान सभा +विधान परिषद

केवल 22 राज्यों में विधानसभा और 07 राज्यों में राज्य विधान परिषद है।

07 राज्यों को कैसे याद रखें-

TAJ KUMB (Telangana, Andhra Pradesh, Jammu Kashmir, Karnataka, uttar Pradesh, Maharastra, Bihar)

यह सब भाग vi में अनुच्छेद 168-212 के बारे में बताता है।

राज्य विधायिका

1) विधानसभा

भारतीय संविधान गठन के अनुच्छेद 170 के अनुसार विधान सभा के सदस्यों की संख्या अधिकतम 500 और न्यूनतम 60 हो सकेंगी।

हालांकि सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के लिए न्यूनतम संख्या 30 है मिजोरम के लिए संख्या 40 है।

राज्य विधानसभा के लिए राज्यपाल द्वारा आंग्ल भारतीय समुदाय से 01 सदस्य को मनोनीत किया जाता है।

पहला सदन या लोकप्रिय सदन(लोगों द्वारा सीधे चुने जाते हैं),विधानसभा अनिवार्य रूप से सभी राज्यों में मौजूद है।

विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है लेकिन विशेष परिस्थितियों में राज्यपाल कोई अधिकार है कि वह इससे पूर्व भी उसको भी गठित कर सकता है।

विधानसभा का सदस्य होने के लिए योग्यता:-

  • भारत का नागरिक हो।
  • 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
  • लाभ के पद पर ना हो।
  • पागल या दिवालिया ना हो।
  • उसका नाम राज्य विधानसभा की मतदाता सूची में शामिल हो।

कार्य व शक्तियां:

विधानसभा को विविध कार्य एवं शक्तियां प्राप्त हैं:-

विधायी कार्य क्षेत्र- विधानसभा को संविधान द्वारा विधित राज्य सूची के विषय पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

वह विधानपरिषद के साथ मिलकर संविधान में संशोधन कर सकती है।

राज्य सूची के विषय पर जहां द्विसदनीय व्यवस्था हो वहां विधान सभा+विधान परिषद+राज्यपाल की सम्मिलित अनुमति अनिवार्य है।

वित्तीय कार्यक्षेत्र: विधानसभा को राज्य बजट पारित करने का अधिकार है।

वह राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत कर उसके बजट अनुमानों को बदलने, काम करने के लिए आदेश दे सकती है।

कार्यपालिका कार्य: क्षेत्र विधानसभा राज्य सरकार पर विभिन्न माध्यमों से निरंतर रखती है।

वह “काम रोको प्रस्ताव”, “ध्यानाकर्षण प्रस्ताव” बाद-विवाद, प्रश्नकाल और अंतिम सत्र के रूप में “अविश्वास प्रस्ताव” पारित कर राज्य सरकार को सत्ताच्युत कर सकती है।

SPEAKER(स्पीकर): 

विधानसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को विधानसभा के सदस्यों के बीच से चुना जाता है।

विधान स्पीकर(SPEAKER) विधान सभा का सदस्य नहीं होता।

स्पीकर, डिप्टी स्पीकर को इस्तीफा देता है।

प्रभावी बहुमत।(14 दिन की अधिसूचना)

नोट: उपराष्ट्रपति के मामले में भी ऐसा ही है।

स्पीकर की शक्ति:

  • आदेश, अनुशासन, शिष्टाचार सब स्पीकर द्वारा बनाए जाते हैं।
  • विशेष रूप से सभा की व्याख्या स्पीकर ही है।
  • वह पहली बार मतदान नहीं करता है (अगर मतदान बराबर हो तो वह मतदान कर सकता है जिसे कासटिस्म मतदान कहा जाता है।
  • स्पीकर यह बताता है, कि यह धन विधेयक है या नहीं। (MONEY BILL)
  • विधान सभा में दलबदल के मामले में स्पीकर विधान परिषद में सदस्य या अध्यक्ष को हटा देता है।
  • स्पीकर,समिति का प्रमुख भी नियुक्त कर सकता है।
  • वह 3 समिति के प्रमुख भी हैं। (शासन,व्यापार,सार्वजनिक)

सत्र (SESSION)

समन (राजयपाल समन भजता है।)

स्थगन (कुछ काम रुक सकते हैं और तारीखों को बढ़ाया जा सकता है।)

सत्रावसान (समाप्त करना ।)

विघटन (सिर्फ विधानसभा में,विधान परिषद में नहीं।)

नोट: अगर कोई विधेयक विधानसभा में लंबित है, तब वो पास नहीं होता और विधानसभा भंग हो जाती है, यदि कोई विधेयक विधान परिषद में विधान सभा के हाथ से पारित हो जाता है तो वह भी पास नहीं होता।

2) विधान परिषद

सरचना:  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत विधान परिषद की संकल्पना प्रस्तुत की गई है।

दूसरा सदन या एल्डर सदन (सीधे चुने नहीं जाते तथा नामित)।

विधान परिषद सभी राज्यों में अनिवार्य रूप से मौजूद नहीं है।

गठन:

  • विधान परिषद के सदस्यों की संख्या उस राज्य के विधान सभा के सदस्यों की संख्या से 1/3 से अधिक नहीं हो सकती।
  • किंतु वह संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, परंतु जम्मू और कश्मीर में सदस्य संख्या 36 है जो कि अब समाप्त हो गई है।
  • विधानपरिषद की संख्या के सदस्यों की संख्या के 1/6 सदस्य राज्य के राज्यपाल द्वारा नवनीत किए जाते हैं।
  • जो कला, विज्ञान, साहित्य, समाज सेवा या सहकारिता क्षेत्र में विशेष अनुभव रखते हैं।
  • विधान परिषद के 1/2 सदस्यों का निर्वाचन अध्यापकों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के माध्यम से होता है।
  • 1/12 सदस्यों का निर्वाचन पूर्व स्नातकों से बने निर्वाचक मंडल के माध्यम से होता है।
  • विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या के 1/3 सदस्य स्थानीय निकायों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा निर्वाचित होते हैं।
  • विधान परिषद के कुल सदस्यों के 1/3 सदस्य उस राज्य की विधान सभा द्वारा निर्वाचित होते हैं।

महत्वपूर्ण:

संयुक्त सत्र में (IN JOINT SITTING)- केवल केंद्र सरकार के मामले में, राज्य सरकार में नहीं।

संयुक्त सत्र को केवल राष्ट्रपति बुलवा सकता है।

State Legislature राज्य विधायिका

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न/उत्तर:-

प्रश्न(01): राज्य का गठन किन के निर्णय से होता है?

उत्तर:  राष्ट्रपति, राज्यसभा, लोकसभा ।

प्रश्न(02): प्रभावी बहुमत क्या है? (WHAT IS EFFECTIVE MAJORITY?)

उत्तर: यदि आप विधानसभा के स्पीकर को या डिप्टी स्पीकर को  विधानसभा से हटाना चाहते हैं या विधानपरिषद के  अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को विधान परिषद से हटाना चाहते हो

प्रश्न(03): यदि कोई राज्य “राज्य विधान परिषद” चाहता है तो?

प्रदेश ने पारित किया संकल्प विशेष बहुमत (resolution special majority) के साथ 2/3 सदस्य बहुमत से चुने जाएंगे।

तब यह संसद को संदर्भित करता है और इसे बहुमत से लोकसभा या राज्यसभा के साथ पारित किया जाता है।

अंत में राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर करता है।

प्रश्न(04): विधान मंडल में प्रयुक्त भाषाएं?

उत्तर: अधिष्ठाता अधिकारी (PRESIDING OFFICER) भाषाओं को हिंदी, अंग्रेजी और राज्य भाषाओं की अनुमति देते हैं।

विशेष अधिकार (SPECIAL RIGHTS)

(1) मंत्री (चर्चा+भाग लेना+बोलना ) लेकिन मतदान नहीं।

(2) महाधिवक्ता (ADVOCATE GENERAL) (चर्चा+भाग लेना+बोलना ) लेकिन मतदान नहीं।

प्रश्न(05): कैसे एक बिल को एक अधिनियम बनाया जाता है? (HOW A BILL BECOME AN ACT?)

एक बिल में तीन रीडिंग होती हैं: (कमेटी,क्लोज बय क्लोज, संशोधन)

इसके बाद यह राज्यपाल के पास जाता है राज्यपाल के पास दो विकल्प होते हैं

(1) स्वीकार करना (तब यह अधिनियम बन जाता है)

(2) स्वीकार नहीं करना

(3) पुनर्विचार करना

नोट: धन विधेयक(MONEY BILL) न तो राज्यपाल द्वारा और न ही राष्ट्रपति द्वारा वापस किया जाएगा

 

संसद (Parliament)

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