District Kullu Part-1

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1963 में, जिले का गठन किया गया

मुख्यालय: कुल्लू (समुद्र तल से ऊंचाई-1219मीटर)

District Kullu Part-1
कुल्लू

कुल क्षेत्रफल: 5503 वर्ग किलोमीटर,साक्षरता दर- 81.14%(2011)

भाषाएं: कुल्ल्वी व हिंदी इत्यादि।

पड़ोसी जिले: (1) उत्तर पूर्व में चंबा तथा लाहौल स्पीति जिला  (2) दक्षिण पश्चिम में मंडी जिला  (3) पश्चिम में कांगड़ा जिला (4) पूर्व में किन्नौर जिला  (5) दक्षिण पूर्व में शिमला जिला

चश्मे:  मणिकरण वशिष्ठ खीरगंगा कसोल और कलथ

नदियां:  सतलुज और व्यास कुल्लू की प्रमुख नदियां है।

  • सतलुज नदी शिमला जिले के साथ कुल्लू जिले की सीमा बनाती है।
  • पार्वती नदी व्यास नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है जो भुंतर में के पास व्यास नदी में मिलती है।

दर्रे: रोहतांग दर्रा, पिन पार्वती दर्रा, जालौरी दर्रा

झीलें: सरवालसर झील, मानतलाई झील, भृगु झील, दशहर झील

इतिहास: 

कुल्लू रियासत की स्थापना-

इस रियासत का पौराणिक ग्रंथों में कुल्लुत देश के नाम से वर्णन मिलता है रामायण, विष्णुपुराण, महाभारत, मार्कंडेय पुराण, बृहतसंहिता और कल्हण की राजतरंगिणी में कुल्लुत का वर्णन मिलता है।

कुल्लू रियासत की स्थापना विहंगमणिपाल ने हरिद्वार से आकर की थी।

भगवती हिडिंबा देवी के आशीर्वाद से विहंगमणिपाल ने रियासत की पहली राजधानी जगतसुख स्थापित की विहंगमणिपाल के पुत्र पछ्पाल ने “गजन” और “बेवला” के राजा को हराया।

कुल्लू रियासत की 07 बजीरियाँ:

(1). परोल वजीरी (कुल्लू)

(2). बजीरी रूपी (पार्वती और सैंज खंड के बीच)

(3). बजीरी लग महाराज (सरवरी और सुल्तानपुर से बजौरा तक)

(4). बजीरी भंगाल

(5). बजीरी लाहौल

(6). बजीरी लग सारी (फोजल और सरवरी खड्ड के बीच)

(7), बजीरी सिराज (सिराज को जालौरी दर्रा दो भागों में बांटता है।

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महाभारत काल: कुल्लू रियासत की कुलदेवी हिडिंबा ने भीम से विवाह किया था।

घटोत्कच भीम और हिडिंबा का पुत्र था जिसने महाभारत युद्ध में भाग लिया था।

भीम ने हिडिंबा का वध किया था जो देवी राक्षसी हिडिंबा का भाई था।

हेनसांग का विवरण: चीनी यात्री हेनसांग ने 635 ईसवी में कुल्लू रियासत की यात्रा की।

उनके अनुसार कुल्लू रियासत में लगभग 1000 बौद्ध भिक्षु महायान का अध्ययन करते थे।

भगवान बुद्ध के कुल्लू भ्रमण की याद में अशोक ने कुल्लू में बौद्ध स्तूप बनवाया।

विसुदपाल: नग्गर के राजा कर्मचंद को युद्ध में हराकर विसुदपाल ने कुल्लू की राजधानी जगतसुख से नग्गर स्थानांतरित की।

रूद्रपाल और प्रसिद्धपाल:

रूद्रपाल के शासनकाल में स्पीति के राजा राजेंद्र सेन ने कुल्लू पर आक्रमण करके उसे नजराना देने के लिए विवश किया।

प्रसिद्धपाल ने स्पीति के राजा छेतसेन से कुल्लू और चंबा के राजा से लाहौल को आजाद करवाया।

दत्तेश्वर पाल : दत्तेश्वर पाल के समय चंबा के राजा मेरु बर्मन ने कुल्लू पर आक्रमण कर दत्तेश्वर पाल को हराया और वह इस युद्ध में मारा गया।

जारेश्वर पाल(780-800) : जागेश्वर पाल ने बुशहर रियासत की सहायता से कुल्लू को चंबा से मुक्त करवाया।

भूपपाल: कुल्लू के 43वें राजा भूपपाल सुकेत राज्य के संस्थापक वीरसेन के समकालीन थे।

उदार्ण पाल(1418-1428) : पाल वंश के 72वें राजा उदार्ण पाल ने जगतसुख में संध्या देवी का मंदिर बनवाया।

कैलाश पाल(1428-1450)(पाल वंश का अंतिम शासक): कैलाश पाल कुल्लू का अंतिम राजा था जिसके साथ पाल उपाधि का प्रयोग हुआ।

सिंह बदानी बंश: कैलाश पाल के बाद के 50 वर्षों के अधिकतर समय में कुल्लू सुकेत रियासत के अधीन रहा, वर्ष 1500 में  बदानी बंश की स्थापना की उन्होंने जगतसुख को अपनी राजधानी बनाया।

बहादुर सिंह(1532): 

सुकेत के राजा अर्जुन सेन का समकालीन था बहादुर सिंह ने वजीरी रूपी को कुल्लू राज्य का भाग बनाया।

बहादुर सिंह: ने अपने पुत्र प्रताप सिंह का विवाह चंबा के राजा गणेश बर्मन की बेटी से करवाया।

जगत सिंह:

कुल्लू रियासत का सबसे शक्तिशाली राजा था औरंगजेब उन्हें “कुल्लू का राजा” कहते थे।

कुल्लू के राजा जगत सिंह ने 1640 ईस्वी में दाराशिकोह के विरुद्ध विद्रोह किया तथा 1657 ईस्वी में उसके फरमान को मानने से मना कर दिया था।

राजा जगत सिंह “टिपरी” के ब्राह्मण की आत्महत्या के दोष से मुक्त होने के लिए राज पाठ रघुनाथ जी को सौंप दिया।

उन्होंने 1653 में दामोदरदास से रघुनाथ जी की प्रतिमा अयोध्या से मंगवा कर स्थापित कर राजपाट उन्हें सौंप दिया।

उनके समय में ही कुल्लू के ढालपुर मैदान पर कुल्लू का दशहरा मनाया जाता है।

राजा जगत सेन 1660 ईस्वी में अपनी राजधानी नग्गर से सुल्तानपुर स्थानांतरित की।

जगत सिंह ने 1660 इसवी में रघुनाथ जी का मंदिर और महल का निर्माण करवाया था।

मानसिंह(1688-1702):

कुल्लू के राजा मान सिंह ने मंडी पर आक्रमण कर गुम्मा नमक की खानों पर 1700 ईस्वी में कब्जा जमाया।

राजसिंह(1702-1731): राजा राजसिंह के समय में गुरु गोविंद सिंह जी ने कुल्लू की यात्रा की।

टेढ़ी सिंह(1742-1767):  राजा टेढ़ी सिंह के समय में घमंड चंद ने कुल्लू पर आक्रमण किया

प्रीतम सिंह(1767-1806):  प्रीतम सिंह संसार चंद द्वितीय का समकालीन राजा था उसके समय कुल्लू का वजीर भागचंद था।

विक्रम सिंह(1806-1816):

विक्रम सिंह के समय में 1810 ईस्वी में कुल्लू का पहला सिख़ आक्रमण हुआ जिसका नेतृत्व दीवान मोहकम चंद कर रहे थे।

अजीत सिंह: राजा अजीत सिंह के समय 1820 ईस्वी में विलियम मूरक्राफ्ट ने कुल्लू की यात्रा की कुल्लू प्रवास पर आने वाले वह पहले यूरोपीय यात्री थे।

कुल्लू रियासत 1840 ईस्वी से 1846 ईस्वी तक सिखों के अधीन रही।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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