District Mandi:Part-1

District Mandi(जिला मंडी ):

District Mandi Part-1

District Mandi part 1
Mandi Town

कुल क्षेत्रफल- 3950 वर्ग किलोमीटर( 7.09% of the total area of Himachal Pradesh)

साक्षरता दर- 82.81%,          जनसंख्या- 9,99,518(14.58% of the total population of Himachal Pradesh)

लिंग अनुपात- 1012

पड़ोसी जिले-

(1)उत्तर पश्चिम में कांगड़ा,  (2)दक्षिण पश्चिम में शिमला, (3)पूर्व में जिला कुल्लू, (4)पश्चिम में हमीरपुर व बिलासपुर

(5)दक्षिण में जिला मंडी की सीमा सोलन जिला की तहसील अर्की में लगती है।

मंडी जिले की प्रमुख घाटियां-

(1) धौलाधार- यह श्रंखला मंडी जिले की पूर्वी सीमा पर स्थित है, मंडी की सबसे ऊंची चोटी नागरू (4400 मीटर) यहाँ पर स्थित है

(2) घोघर धार – गुम्मा और द्रंग नमक की खानें यहाँ पर स्थित है, यह धार जोगिंदर नगर के पास हराबाग नामक स्थल पर जिले में प्रवेश करती है।

(3)  सिकंदर धार- 

  • धार का नाम सिकंदर लोदी के नाम पर पड़ा जिसने कांगड़ा अभियान के दौरान इसे पार किया था।
  • इस धार को दो उप धाराओं में विभाजित किया गया है- कमलाह धार व लिंडी धार।

(4) वेरकोट धार-

  • यह धार रिवालसर से शुरू होकर सुकेत तक जाती है, इस श्रृंखला से होकर दो महत्वपूर्ण नदियां व्यास व सतलुज बहती है।

 

जिला मंडी में महत्वपूर्ण झीलें हैं-

(1)रिवालसर, (2)पराशर, (3)कामरूनाग, (4)मछीयाल

मछीयाल झील-

  • झील जिला मंडी के जोगिंदर नगर में स्थित है,इसकी लंबाई 200 मीटर है।
  • इस झील के पानी का स्त्रोत मुख्यतः व्यास नदी की सहायक खड्ड “राणा तथा नेरी” खड्ड है।
  • झील का नामकरण भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार मच्छिंद्रनाथ पर किया गया है।
  • वैशाखी के समय मछीयाल के समीप तीन दिवसीय मेला लगता है, झील में सुनहरी महाशीर मछलियां पाई जाती हैं

नदियां- 

(1) सतलुज-

  • सतलुज “फिरनू” गांव से मंडी में प्रवेश करती है।
  • यह सोलन और शिमला से मंडी जिले की सीमा बनाती है।

(2) व्यास नदी-

  • लारजी के पास मंडी में प्रवेश करती है। इस स्थान पर सैंज और तीर्थन नदी व्यास में मिलती है।
  • पण्डोह द्वारा ब्यास नदी का पानी दो सुरंगों से सतलुज में मिलाया जाता है।

मंडी जिले का निर्माण सुकेत और मंडी रियासत को मिलाकर 15 अप्रैल 1948 को किया गया था।

कुछ महत्वपूर्ण बातें-

  • 1926 ई.में-
  • मंडी की पहली जल विद्युत प्रयोजना जोगिंदर नगर में स्थापित हुई।
  • जिसका प्रथम चरण 1933 ई. में बनकर तैयार हुआ, इसे इंजीनियर कर्नल बी सी बैटी ने शुरू करवाया था।
  • इसे शानन परियोजना के नाम से जाना जाता है,1933 में इसका उद्घाटन लॉर्ड विलिंगडन ने किया था।
  • 1926 ई.में- पठानकोट जोगिंदरनगर रेलवे लाइन लाइन बनकर तैयार हुई।
  1. 1962 ई.में जर्मनी के सहयोग से मंडी में इंडो -जर्मन चंगर परियोजना शुरू की गई।
  2. 10 जून, 1974- HPMC ने जरौल में सेब प्रसंस्करण इकाई को विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से स्थापित किया गया था।
  3. जर्सी गायों के प्रजनन के दो केंद्र मंडी के कमांण्ड और करसोग में है।
  4. भेड़ प्रजनन केंद्र नगवाई में स्थित है।
  5. बंगरोटू में मुर्गी के चारे की इकाई स्थापित की गई है, चौंतड़ा में पोल्ट्री फार्म स्थापित किया गया है।
  6. गुम्मा व द्रंग में नमक की खानें है।

<h3style=”font-size: 16px;”>District Mandi

मेले-

(1)शिवरात्रि मेला, (2)माहुनाग मेला, (3)छेच्च्सु मेला (रिवलसर)

इतिहास-

सुकेत रियासत-

इतिहास के पन्नों में सुंदरनगर का प्रथम नाम “शुकक्षेत्र फिर शुकखेत व उसके पश्चात सुकेत” था।

स्थानीय परंपरा के अनुसार इस क्षेत्र में कोई सुखदेव नाम का नाम के महात्मा रहते थे उन्हीं के नाम से इस क्षेत्र का नाम सुक्षेत्र पड़ा और बाद में सुकेत।

सुक्षेत्र का अर्थ है- अच्छी भूमि पाणिनि ने इस क्षेत्र का “सुकुट” नाम से उल्लेख किया है।

सुकेत रियासत की स्थापना- 765 ई. में वीरसेन ने की थी, राजधानी सुरही इलाके के पंगाणा में स्थापित की।

कनिंघम के अनुसार सेन वंश बंगाल से आया था।

वीरसेन- 

  • पंगाणा जागीर को दहेज में मूसानवरमन को दिया।
  • कुल्लू के राजा भूपपाल को कैद कर कुल्लू रियासत को अपनी जागीर बनाया।
  • कांगड़ा के साथ सीमा रेखा निर्धारित कर सिर खड्ड पर “वीरा दुर्ग” बनवाया।
  • हाटली के राणा को हराने के उपलक्ष में वीरकोट दुर्ग का निर्माण करवाया।

लक्ष्मण सेन-  कुल्लू के राजा “हमीर पाल” से युद्ध करके उससे “वजीरी रूपी”, लागसारी, और परोल, के कुछ भाग पर कब्जा कर लिया।

  • 1000 ई.में- साहूसेन के भाई बाहुसेन ने मंगलौर में मंडी रियासत की स्थापना की।

मदनसेन(1240 ई.)-

  • मदन सिंह के शासन में सुकेत रियासत अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर पहुंच गया था।
  • मदन सेन ने गुम्मा व द्रंग के रानाओं को हराकर नमक की खानों पर कब्जा कर लिया।
  • पंगाना से राजधानी बदलकर लोहारा (बल्ह घाटी) स्थापित की।
  • उन्होंने मदन कोट दुर्ग का निर्माण करवाया।
  • उन्होंने पंगाणा में “अष्टमवनाथ मंदिर” का निर्माण करवाया।
करतार सेन (1520 ई.)
  • तारामडी वन के नीचे एक नगर बसाया ,जिसका नाम “करतापुर रखा” ,अब इस स्थान को “पुराना नगर” कहा जाता है।
  • राजधानी लोहरा से करतारपुर स्थानांतरित की।

उदय सेन(1560-1590ई.)-

  • उदय सिंह सुकेत का 36 वां राजा था।
  • चड़ी राणा को हराकर उसके क्षेत्र को अपने राज्य में मिला लिया ,और “उदयपुर” किला बनबाया।

श्याम सेन(1620 ई.)-

  • नूरपुर के राजा जगत सिंह की शिकायत पर मुगल सम्राट औरंगजेब ने दिल्ली बुलाकर कैद कर दिया।
  • श्याम सेन के बाद राम सेन ने माधोपुर में “रामगढ़ दुर्ग” बनवाया।

गरुड़ सेन(1721-48 ई.)- 

  • सुंदरनगर (प्राचीन नाम बनेड) शहर की स्थापना की।
  • गरुड़ सेन की रानी ने सूरजकुंड मंदिर का निर्माण करवाया।

विक्रम सेन(1748-1767 ई.)- 

  • 1752 ई.में अहमद शाह दुर्रानी ने सुकेत पर कब्जा किया।
  • 1758 ई.में अदीना बेग ने सुकेत रियासत पर कब्ज़ा किया, अदीना बेग ने पठानकोट के नज़दीक “आदीनानगर” की स्थापना की।
  •  1758 ई.में जस्सा सिंह रामगढ़िया ने सुकेत पर शासन किया।

रणजीत सेन(1767-1791ई.)- 

  • 1767-1791ई.- रणजीत सिंह के समय जय सिंह कन्हैया ने सुकेत को अपने अधीन रखा।

विक्रम सेन द्वितीय(1791-1838 ई.)- 

  • विक्रम सेन ने बनेड सुंदर नगर को अपनी नई राजधानी बनाया।
  • 1809 ई.में- महाराजा रणजीत सिंह के अधीन आ गई।
  • 1820 ई.में- विलियम मूरक्राफ्ट ने सुकेत रियासत की यात्रा की।
उग्रसेन(1838-76)- 
  • 1839 ई.में- विगने ने सुकेत रियासत की यात्रा की।
  • 1840 ई.में- नौनिहाल ने जनरल वन्चूरा के नेतृत्व में सुकेत रियासत पर कब्ज़ा किया।
  • 1846 ई.में- सुकेत रियासत अंग्रेजों के अधीन आ गई।
  • उग्रसेन के वजीर नरोत्तम ने दुर्गा मंदिर का निर्माण करवाया।
  • उग्रसेन ने अमला विमला में शिव मंदिर का निर्माण किया।
दुष्ट निकंदन सेन- 
  • इनके समय 1893 ई.में भोजपुर में स्कूल।
  • 1889 ई.में- सतलुज नदी के ऊपर ज्यूरी में पुल का निर्माण किया गया।
  • 1900 ई.में- बनेड़ में पोस्ट ऑफिस।
  • 1906 ई.में- टेलीग्राफ खोला गया।

भीमसेन-

  • बनेड़ में किंग एडवर्ड अस्पताल खोला।
  • मंडी सुकेत मोटर सड़क का निर्माण करवाया।

लक्ष्मण सेन-

  • सुकेत रियासत का अंतिम राजा।
  • 1921 ईस्वी को सुकेत रियासत पंजाब सरकार से ब्रिटिश भारत सरकार के अधीन आ गई।

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