Himachal House clears Bill to amend FRBM Act

Himachal House clears Bill to amend FRBM Act

आज की डेट में धर्म परिवर्तन एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है जहां पर कुछ गरीब लोगों को या अशिक्षित लोगों को अलग-अलग तरीके का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

ऐसे में कौन लोग शामिल है इनका नाम इस लेख में लेना नहीं चाहूंगा।

धर्म परिवर्तन एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है और ऐसे में लोगों को रोकना लोगों को शिक्षित करना एक बहुत जरूरी काम हो चुका है।

लेकिन इसको रोकने के लिए कानून बनाए जाने की भी पूरी आवश्यकता थी जो कि अब होना शुरू हो चुका है।


और अगर इस तरीके से धर्मांतरण होता है तो वह भी अवैध रूप से गैरकानूनी कहलाएगा।

हिमाचल प्रदेश में धर्म परिवर्तन कानून को और कड़ा कर दिया गया अब अनुसूचित जाति और अन्य आरक्षित श्रेणी के व्यक्ति ने अगर धर्म परिवर्तन किया तो उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा।

आरक्षण का लाभ छोड़ने के लिए संबंधित शख्स को एफिडेविट देना होगा शनिवार को हिमाचल प्रदेश की मौजूदा BJP सरकार ने आखिरी सेशन के अंतिम दिन विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इससे जुड़े कानून के संसोधन को मंजूरी दे दी।


इसी साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने है। (हिमाचल प्रदेश में)

अब उससे पहले विधानसभा का कोई सेशन नहीं होगा शनिवार को विधानसभा के मानसून सत्र में पास किए गए धर्मांतरण संबंधी में एक का नाम हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 है।

संशोधित कानून के अनुसार अब जबरन या किसी भी तरह के लालच से सामूहिक धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।

अब यदि 2 या उससे ज्यादा व्यक्तियों ने धर्म परिवर्तन किया तो सामूहिक धर्म परिवर्तन माना जाएगा और पकडे जाने पर सभी को सीधे 10 साल की जेल और ₹200000 का जुर्माना भरना होगा


हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है।

जहां साल 2005 में वीरभद्र सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने ये कानून बनाया था।

इसके बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर वीरभद्र सिंह की अगुवाई वाली पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के इस एक्ट के कुछ प्रावधान रद किए गए थे।


Himachal House clears Bill to amend FRBM Act


लेकिन साल 2017 में राज्य में जयराम ठाकुर की अगुवाई में बनी BJP सरकार ने 20 अगस्त 2022 को आखिरी सेशन के आखिरी दिन इस एक्ट में कुछ कड़े प्रावधान जोड़ें हैं।

इस एक्ट में धर्म परिवर्तन का दोष पाए जाने पर 7 साल की सजा का प्रावधान था। अब इसे बढ़ाकर 10 साल किया जा रहा है।

और यही नहीं, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाद करने के लिए अपने धर्म को छुपाता है तो उस सूरत में संबधित व्यक्ति के खिलाफ भी 3 से 10 साल की सजा और न्यूनतम ₹50000 जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


जुर्माने की रकम अधिकतम ₹100000 तक बढ़ाई जा सकती है।

हिमाचल प्रदेश धर्म की स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2022 में धर्म परिवर्तन करने से एक महीना पहले मजिस्ट्रेट के सामने एफिडेविट देना होगा।

यदि कोई अपने मूल धर्म से वापस लौटना चाहे तो उसे पूर्व नोटिस की जरूरत नहीं होगी।

धर्म परिवर्तन के बावजूद मूल धर्म की सेवाएं लेने पर संबंधित व्यक्ति को 2 साल से 5 साल तक की सजा और ₹5000 से ₹100000 तक के जुर्माने का प्रावधान है।


धर्म परिवर्तन ने शिकायत मिलने पर सब इंस्पेक्टर लेवल से नीचे रैंक का पुलिस अधिकारी केस की जांच नहीं कर सकेगा।

इससे जुड़ा मुकदमा भी सेशन कोर्ट में ही चल सकेगा।

शनिवार को विधानसभा में धर्मांतरण संबंधी संशोधित एक्टपास होने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर इस तरह का सख्त कानून बनने या बनाने वाला हिमाचल प्रदेश संभवता देश का पहला राज्य है।


ताजा संशोधन के जरिए सरकार ने एक्ट को और भी ज्यादा सख्त बनाया है तो ऐसे में अब यह बात वाकई में सही तरीके से सामने आ रही है।

प्रोजेक्ट भी हो रही है कि धर्म परिवर्तन को अब ऐसे ही रोका जा सकता है।

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