Kangra District (part-3)

Kangra District भाग 3

Kangra District

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(1) 1748 ई में- राजा अभयचन्द ने ठाकुरद्वार और टिहरा में एक किले की स्थापना की। 

(2) 1751 ई में- घमंडचन्द को राजा बनाया गया।

  • घमंडचन्द के समय मराठा दक्षिण में अपना राज्य विस्तार कर रहे थे, और उत्तर पश्चिम की ओर से नादिर शाह और उसके बाद अहमद शाह अब्दाली ने आक्रमण आरंभ कर दिए।
  • पंजाब में एक नहीं सकती का संचार हो रहा था शक्ति के जन्मदाता सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह थे।
  • 1699 ईसवी में- बिलासपुर में स्थित आनंदपुर में 80000 व्यक्तियों की एक सभा बुलाकर “खालसा पंथ” की स्थापना की।
  • 1752 ई में- अहमद शाह अब्दाली का तीसरी बार भारत पर आक्रमण। उसने पंजाब तथा पहाड़ी इलाके को अपने कब्जे में ले लिए
  • घमंड चंद के लिए यह यह सही समय था-
  • उसने पहाड़ी राजाओं के साथ युद्ध कर गुलेर,जसवां,सिब्बा और दातारपुर के राजाओं को हराकर अपने अधीन कर लिया कर।
  • 1755 ई में- कुल्लू के राजा टेढ़ी सिंह के विरुद्ध युद्ध की घोषणा और कुल्लू पर अधिकार।
  • 1759 ई में- घमंड चंद को जालंधर दोआब तथा सतलुज और रावी के बीच वाले पहाड़ी क्षेत्र का प्रतिनिधि नियुक्त किया।
  • 1769 ई में- अहमद शाह अब्दाली का भारत पर नवां और अंतिम आक्रमण।
  • 1761 ई में- घमंड चंद ने व्यास नदी के किनारे पर टिहरा सुजानपुर  नगर बसाया और इसे अपनी राजधानी बनाया।
  • घमंड चंद ने 24 वर्ष पर तक शासन किया और कई मजबूत दुर्ग का निर्माण करवाया।

(3) 1775 ई में- 10 वर्ष की आयु में संसार चंद को राजा बनाया गया।

  • 1781 ई में- कांगड़ा किले पर कब्जा करने के लिए संसार चंद ने जय सिंह कन्हैया को बुलाया।
  • 1783 ई में- जयसिंह कन्हैया का कांगड़ा किले पर कब्जा,चार वर्षो तक उसके कब्ज़े में रहा।
  • 1787 ई में- कांगड़ा का किला वापिस कटोच राजा के पास आ गया।
  • संसार चंद की महत्वकांक्षाएं बढ़ने लगी-
  • कुछ दिनों में मंडी, सुकेत,बिलासपुर, नालागढ़, आदि पर आक्रमण कर अपने अधीन कर लिया।
  • 1792 ई में– मंडी पर आक्रमण- मंडी के राजा ईश्वरी सेन तथा उसके भाई जालम सिंह को बंदी बनाकर 12 वर्ष तक नादौन में रखा।
  • 1794 ई में- रिहलू क्षेत्र को लेकर संसार चंद और चंबा के राजा राज सिंह के बीच युद्ध।
  • गुलाम मोइउद्दीन ने अपनी पुस्तक “तारीख -ए -पंजाब “में लिखा है कि

राजा संसार चंद बहादुरी में हातिम तथा उदारता में उस काल रुस्तम था।

  • 1795 ई में- संसार चंद का बिलासपुर पर आक्रमण(Kangra District)

  • रानी नगर देवी तथा उसके पुत्र महान चंद ने सिरमौर के राजा धर्म प्रकाश से सहायता मांगी।
  • राजा धर्म प्रकाश हिंडूर के राजा राम शरण सिंह को साथ लेकर कहलूर पहुंचा।
  • धर्म प्रकाश लड़ाई में मारा गया और इसके साथ ही कहलूर (बिलासपुर) सेना कि हार हुई।
  • संसार चंद ने सतलुज के दाहिने किनारे वाले क्षेत्र पर अधिकार कर लिया और झंझारधार किला बनवा दिया,जिसे छातीपुर अर्थात “कहलूरियों की छाती ” का नाम दिया।
संसार चंद का बिलासपुर पर आक्रमण बना कटोच वंश के पतन का कारण कटोच वंश के-
  • बिलासपुर पर आक्रमण के कारण दूसरे पहाड़ी राजा  सतर्क हो गए।
  • उन्होंने अपने आप को संगठित किया,और बिलासपुर के राजा महान चंद्र के नेतृत्व में गोरखों को कांगड़ा पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया।
  • 1805ई में- अमर सिंह थापा ने 40000 सैनिकों को लेकर बिलासपुर के पास सतलुज नदी को पार किया।
  • चंबा के राजा जीत सिंह ने नत्थू वजीर के नेतृत्व में अपनी सेना गोरखों की सहायता के लिए भेजी।
  • बिलासपुर,सुकेत,सिरमौर,चंबा की संयुक्त सेनाओं के साथ मिलकर महल मोरियो (जिला हमीरपुर, भोरंज के समीप) में संसार चंद को हराया।
  • 1809 ई में- नोरंग वजीर और रणजीत सिंह के बीच संधि हुई ,महाराजा रणजीत सिंह ने अमर सिंह थापा को हराया।
  • संधि के अनुसार संसार चंद ने कांगड़ा किला और 66 गांव महाराजा रणजीत सिंह को दिए।
  • देशा सिंह मजीठिया को काँगड़ा किले व क्षेत्र का गवर्नर बनाया।
  • 1824 ई में- संसार चंद की मृत्यु हुई।

1846 ई में- कांगड़ा Kangra District पूर्ण रूप से ब्रिटिश के अधीन आ गया।

गुलेर रियासत- पुराना नाम ग्वालियर
  • स्थापना- 1405 ईस्वी में राजा हरिचंद ने हरिपुर में की,हरिपुर किले को गुलेर किला भी कहा जाता है।
  • गुलेर रियासत के जय राजा रामचंद्र और जगदीश चंद्र अकबर के समकालीन राजा थे।
  • राजा रूपचंद जहांगीर का समकालीन था, उसने कांगड़ा पर किले कब्जे के लिए मुगलों की मदद की।
  • 1635-1661 ई. – इस समय राजा मानसिंह थे, मानसिंह को उसकी बहादुरी के लिए शाहजहां ने “शेर अफगान” की उपाधि दी थी।
  • मानसिंह ने मानगढ़ का किला बनवाया था।
  • 1675-1695 ई. – गुलेर रियासत का राजा राज सिंह था उसने चंबा के राजा चत्तर सिंह, बसौली के राजा धीरज पाल और जम्मू के कृपालु देव के साथ मिलकर मुगलों को हराया था।
  • भूप सिंह गुलेर का आखिरी राजा था।
नूरपुर राज्य – प्राचीन नाम-धमेरी

स्थापना- 1000 ईस्वी में दिल्ली के तोमर राजपूत झेठपाल द्वारा की गई।

  • जसपाल(1313-1337 ई.) अलाउद्दीन खिलजी का समकालीन था।
  • भीमपाल(1473-1513 ई.) सिकंदर लोदी का समकालीन था।
  • भगतमल(1513-1558 ई.)  का विवरण अकबरनामा में मिलता है भक्तमल के समय शेरशाह सूरी के पुत्र सलीमसूर शाह ने मकोट किला बनाया।
  • 1558 ई.में-  भगतमल को गिरफ्तार कर लाहौर भेज दिया गया,जहां बैरम खां ने उसे मरवा दिया।
  • 1622 ई.में- राजा जगत सिंह थे इसी समय जहांगीर अपनी पत्नी नूरजहां के साथ धमेरी आए जगत सिंह ने नूरजहां के सम्मान में धमेरी का नाम नूरपुर रखवाया।
  • 1686 ई.में- भूप सिंह ने इस्लाम कबूल किया और वह मुरीद खान के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  • 1785 ई.में- नूरपुर रियासत लखनपुर के पास स्थानांतरित हो गई जोकि 1846 ई. तक वही रही।
  • 1846 ई.में- अंग्रेजों का नूरपुर पर कब्जा।
सिब्बा राज्य –

स्थापना -1450 ई में सिबराम चंद ने की।

  • सिब्बा राज्य को डाडा सिब्बा भी कहा जाता है।
  • 1809-30 तक- महाराजा रणजीत सिंह के कब्जे में रहा।
दतारपुर राज्य-

स्थापना- 1550 ईस्वी में अवतार चंद ने की थी।

  • डडवाल इस राज्य के परिवार का उपनाम है।
  • 1848 ई में-दतारपुर के राजा जगत सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया तो उन्हें कैद कर अल्मोड़ा भेज दिया गया, वहां उनकी मृत्यु 1877 में हो गई।

बघाहल राज्य-Kangra District

स्थापना-एक ब्राह्मण ने की जो राजा बनने के बाद चंद्रवंशी राजपूत कहलाया।

  • राजधानी- वीर।
  • पाल इस राज्य के परिवार का उपनाम है।
  • पृथ्वी पाल इस राज्य का प्रसिद्ध राजा था।
  • 1720 ईस्वी में- मंडी के राजा सिद्धसेन ने पृथ्वी पाल को दमदमा महल में मरवाया था।
  • अंतिम शासक- मानपाल(1749)।

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