Round Table Conferences

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प्रथम गोलमेज सम्मेलन

प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन 12 नवंबर, 1930 से 13 जनवरी, 1931 तक लंदन में हुआ।

इस सम्मेलन का उद्घाटन ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम ने किया तथा अध्यक्षता प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की

इस सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया हिंदू महासभा मुस्लिम लीग तथा उदारवादी नेताओं के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किए जा सकते हैं।

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व किया।

  1. तीनों ब्रिटिश दल लिबरल, कंजरवेटिव और श्रमिक दल के प्रतिनिधि
  2. ब्रिटिश भारत से ब्रिटिश सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य
  3. भारत के राज्यों से राजकुमार या उनके द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि

निष्कर्ष

भारत के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन ‘कांग्रेस’ के सम्मेलन में भाग ना लेने से यह सम्मेलन अधूरा सा हो गया था अंततः 19 जनवरी 1931 को बिना किसी वास्तविक उपलब्धि से यह सम्मेलन समाप्त हो गया।

 

Important sessions of congress (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन)

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द्वितीय गोलमेज सम्मेलन 1931 ई.

7 सितंबर से 1 दिसंबर, 1931 तक सम्मेलन का आयोजन ‘लंदन’ में किया गया।

गांधी जी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में इस सम्मेलन में भाग लिया। (v.imp)

भारत वापस आकर गांधी जी ने पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ किया।

दक्षिणपंथी नेता ‘विंस्टन चर्चिल’ ने गांधीजी को देशद्रोही फकीर कहा। (v.imp)

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में मदन मोहन मालवी और एनी बेसेंट ने खुद के खर्च पर हिस्सा लिया था।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन असफल रहा था।

तृतीय गोलमेज सम्मेलन 1932 ई.

17 नवंबर, 1932 से 24 दिसंबर, 1932 तक लंदन में तीसरे गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस गोलमेज सम्मेलन का विरोध करते हुए बहिष्कार किया।

तीसरे गोलमेज सम्मेलन में भारत सरकार अधिनियम 1935 को अंतिम रूप प्रदान किया गया।

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