Volcano

A Volcano is a rupture in the crust of a planetary-mass object, such as Earth, that allows hot lava, volcanic ash, and gases to escape from a magma chamber below the surface

ज्वालामुखी

  • ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर उपस्थित ऐसी दरार या मुख होता है, जिससे होकर पृथ्वी का पिघला पदार्थ, लावा, राख, जलवाष्प, ठोस पदार्थ तथा अन्य गैसें बहार निकलती है, इसे प्रकृति “सुरक्षा वाल्व” भी कहा जाता है।
  • जलवाष्प (80-90%) के अलावा कार्बन डाइ-ऑक्साइड, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन गैसें इसमें पायी जाती है ।
  • ज्वालामुखी में जब तरल पदार्थ को भू-सतह के नीचे होता है उसे “मैग्मा” कहते है और सतह पर आने के बाद इसे “लावा” कहते है।

मैग्मा दो प्रकार के होते हैं



(01) बेसाल्टी मैग्मा

  • इसमें लगभग 50%  Sio2 मौजूद होता है, और इसका तापमान बहुत अधिक होता है। 
  • सिलिका की कम मात्रा में होने कारण इसमें फेरोमैगनिसियन पदार्थों की मात्रा ज्यादा होती है।
  • यह अधिक तरल होते हैं, और तेजी से एवं शांत रूप से प्रभावित होते हैं।

(02) ग्रेनाइट मैग्मा

  • इसमें 60 से 70% तक Sio2 मौजूद होता है इसका तापमान 8000 सेंटीग्रेड से कम होता है। 
  • यह “फेलिस्क” खनिज युक्त होते हैं। 
  • सिल्का की उच्च मात्रा के कारण यह गाढ़ा और चिपचिपा होता है, और ये विस्फोटक उद्गार के कारण बनते हैं।

 पायरोक्लास्ट

  • ज्वालामुखी से निकलने वाले ठोस चट्टानी टुकड़ों को कहते है।

संसार में घटित होने वाली ज्यादातर ज्वालामुखी घटनाएं विनाशात्मक प्लेट किनारों पर होती है।

सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी “नवीन मोड़दार पर्वतीय क्षेत्रों” में पाए जाते है।

ज्वालामुखी(Volcano) क्रिया के दो रूप होते हैं

1. पहली प्रक्रिया धरातल के नीचे

जब मैग्मा धरातल के नीचे भूगर्भ में ठण्डा होकर जम जाता है, मैग्मा जम जाने पर कुछ स्थलाकृतियों को बनता है।

उदाहरण

  • बैथोलिथ
  • फैकोलिथ
  • लैपोलिथ
  • सिल तथा डाइक

2. दूसरी प्रक्रिया धरातल के ऊपर और इसमें प्रमुख है-

  1. ज्वालामुखी धरातलीय प्रवाह
  2. गर्म जल के स्त्रोत
  3. गीजर, धुंआरे।

ज्वालामुखी पर्वत का निर्माण

  • ज्वालामुखी छिद्र के चारों तरफ लावा के अत्याधिक मात्रा में जमा होने पर इन पर्वतों का निर्माण होता है।
  • इस पर्वत के ऊपर बीच में एक छिद्र होता है, जिसे “ज्वालामुखी छिद्र” कहते हैं।
  • “ज्वालामुखी छिद्र” आकृति “कीपाकार” की होती है।
  • इस छिद्र का धरातल के नीचे भूगर्भ से संबंध एक पतली नली से होता है, जिसे “ज्वालामुखी नली” कहते हैं।
  • जब ज्वालामुखी का छिद्र विस्तृत हो जाता है, तो उसे ज्वालामुखी “क्रेटर” कहते हैं।

ज्वालामुखी पहाड़ों के उदाहरण-

  • मेक्सिको का पाराक्यूटिन
  • हवाई का मोनालोआ
  • इटली के विसुवियस और स्ट्रोंबोली

ज्वालामुखी की सक्रियता

सक्रिय ज्वालामुखी

ऐसे ज्वालामुखी  जिनके मुख से सदैव धूल, धुंआ, वाष्प, गैसें, राख, लावा आदि पदार्थ बाहर निकलते रहते हैं।

Volcano
सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcano)

 

प्रसुप्त ज्वालामुखी

इस प्रकार के ज्वालामुखी में लम्बे समय से विस्फोट नहीं हुआ होता है , किन्तु इसकी संभावनाएं बनी रहती है, ये ज्वालामुखी कभी भी क्रियाशील हो सकते हैं।

उदाहरण

  • विसूवियस(इटली)
  • फ्यूजीयामा (जापान)- यह जापान का सबसे ऊँचा पर्वत भी है
  • क्राकाटाओ (इंडोनेशिया)- इसमें 2018 में फिर से विस्फोट हुआ था 
  • नारकोंडम (अंडमान-निकोबार) 

मृत या शांत ज्वालामुखी

जिनमें ऐतिहासिक काल में कोई उदगार नहीं हुआ है और जिनमे पुन: उदगार होने की संभावना नहीं है।

उदाहरण

  • ईरान का कोह सुल्तान एवं देवबंद
  • म्यांमार का पोपा
  • तंजानिया का किलीमंजारो
  • इक्वेडोर का चिम्बराजो
  • एंडीज का एकांकागुआ 

Volcano In English

ज्वालामुखियों का वितरण

  • 80% ज्वालामुखी विनाशात्मक प्लेट (Destructive Plate)किनारों पर तथा शेष प्लेट के आंतरिक भागों में पाए जाते है।
  • अमेरिका एवं एशिया महाद्वीप के तटों पर सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखी स्थित है
  • ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में एक भी ज्वालामुखी नहीं है ।

ज्वालामुखी का वितरण

Volcano
ज्वालामुखी का वितरण

(01) प्रशांत महासागर पेटी

  • इस पेटी में सबसे अधिक ज्वालामुखी केंद्रित हैं, इसीलिए से “प्रशांत अग्नि वलय” करते हैं। 
  • यह वलय दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वत श्रेणी से प्रारंभ होकर अलास्का तक तथा अलल्यूशन द्वीप से जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, से न्यूजीलैंड तक फैली हुई है।

(02) मध्यवर्ती पेटी

  • यह यूरोप में अल्प्स पर्वत से प्रारंभ होकर टर्की तथा हिमाचल पर्वत प्रदेश से होती हुई प्रशांत महासागरीय पेटी से मिल जाती है।

(03) अफ्रीकी दरारघाटी पेटी

  • इस पेटी के अधिकांश ज्वालामुखी विलुप्त प्रकार के हैं
  • केवल “माउंट कैमरून” ज्वालामुखी जो कि पश्चिमी मध्य अफ्रीका में स्थित है, एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। 
ज्वालामुखी उद्गार के फलस्वरुप निर्मित अन्य प्रमुख स्थलरूप

गेसर:

गर्म जल स्रोत होते हैं जिनसे अवकाश के बाद गर्म जल तथा वाष्प तीव्रता से निकलता है।

उदाहरण

  • संयुक्त राज्य अमेरिका के यलोस्टोन नेशनल पार्क का ओल्ड फेथफुल गेसर
  • एक्सेल्सियर गेसर,
  • आइसलैंड और न्यूज़ीलैंड प्रधान गेसर क्षेत्र

गर्म जल स्त्रोत:

वाष्प तथा गर्म जल निरंतर निकलता है, इस क्रिया में कोई अवकाश नहीं पाया जाता है।

गेसर

इसका संबंध ज्वालामुखी क्रिया से है जबकि गर्म जल स्त्रोत का कारण पृथ्वी के आंतरिक भाग से संबंधित होना है।

धुआंरे

ऐसे छिद्र जिसके सहारे गैस तथा वाष्प निकला करती है वास्तव में धुआँरे ज्वालामुखी की सक्रियता के अंतिम लक्षण माने जाते हैं ।

सोल्फतारा:

ऐसे धुँआरे जिनसे अधिक मात्रा में गंधक का धुआं निकलता है ।

कॉल्डेरा:

का निर्माण क्रेटर के धंसाव अथवा ज्वालामुखी के विस्फोटक उद्भेदन से होता है।

ज्वालामुखी(Volcano) विस्फोट के माध्यम से बाहर निकलने वाले पदार्थ

ज्वालामुखी विस्फोट के कारण ठोस, तरल और गैस तीनों प्रकार के पदार्थ बाहर निकलते हैं:

(1) ठोस पदार्थ

ज्वालामुखी विस्फोट के माध्यम से बारीक धूल-कणों तथा राख से लेकर कई शिलाखंड भी बाहर निकलते हैं।

लैपिली(Lapillus)

सूक्ष्म आकार वाले  शिलाखंडों को लैपिली कहते हैं।

ज्वालामुखी बम (Volcanic Bomb)

छह-सात सेंटीमीटर से लेकर एक मीटर व्यास वाले शिलाखंडों को “ज्वालामुखी बम” कहते हैं।

ज्वालामुखी संकोणाश्म (Volcanic Breecia)

कभी-कभी बहुत छोटे-छोटे नुकीले शिलाखंड लावा से चिपककर संगठित हो जाते हैं, जिन्हें “ज्वालामुखी संकोणाश्म” (Volcanic Breecia) कहते हैं।

(2) तरल पदार्थ

  • ज्वालामुखी से निकलने वाले तरल पदार्थ को “लावा” कहते हैं।  यह बहुत ही गर्म होता है।
  • ताजा निकले लावे का तापमान “6000 से 12000  सेल्सियस तक होता है।
  •  इसकी गति अधिकतर धीमी होती है, परन्तु कभी-कभी यह 15 किमी. प्रति घंटा की गति से भी बाहर निकलता है।
  • लावा जब अधिक तरल हो तथा भूमि की ढाल अत्यधिक तीव्र हो तो यह 80 किमी. प्रति घंटा की गति से भी बाहर निकलता है।

(3) गैसीय पदार्थ

  • ज्वालामुखी विस्फोट के समय कई प्रकार की गैसें निकलती हैं जिनमें हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बन-डाई-सल्फाइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं अमोनिया क्लोराइड प्रमुख हैं। 
  • गैसों में जलवाष्प का महत्व सबसे अधिक है।
  • ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाली गैसों में 60 से 90% भाग जलवाष्प का ही होता है। 

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